NOTE:- ENGLISH AND HINDI LANGUAGE:-
प्रश्नन--- "रजिया में एक अच्छे शासक के सभी गुण निहित थे, किन्तु वह असफल रही, क्योकि इसके लिए उसका स्त्रीत्व उत्तरदायी था।"व्याख्या कीजिए?
अथवारजिया सुल्तान के चरित्र एवं उपलब्धियों का मूल्यांकन कीजिए। क्या रजिया का स्त्री होना उसके पतन का कारण माना जा सकता है?
अथवा
रजिया के सिंहासनरोहण की परिस्थितियों का वर्णन कीजिए और उसके पतन के कारणों पर प्रकाश डालिये।
Dr Om Prakash Singh
उत्तर----रजिया सुल्तान दिल्ली की प्रथम मुस्लिम महिला सुल्तान थी, जो इल्तुतमिश के उत्तराधिकारियो में सबसे योग्य मानी जाती है। उसमें कूटनीतिक राजनीतिक, एवं प्रशासनिक क्षमताएं कूट-कूट कर भरी हुई थी। उसने सिर्फ चार वर्षों(1236--1240 ई0) तक शासन किया, तथापि उसके राज्यारोहण का सल्तनत के इतिहास में विशेष महत्व है।
रजिया सुल्तान का राज्यारोहण----- इल्तुतमिश ने अपनी मृत्यु के पूर्व अपना राज्य अपनी बेटी को सौंपने की इच्छा व्यक्त की थी और अपने बेटों के स्थान पर रजिया को अपना उत्तराधिकारी मनोनीत किया था। परन्तु तुर्क अमीर एक स्त्री को राज्य करते हुए देखना अपना अपमान समंझते थे। अतः अनेक तुर्क अमीरों ने रुकनुद्दीन फिरोजशाह की माता शाहतुर्कान और अनेक इक्तादारों ने षड्यंत्र कर रुकनुद्दीन फिरोजशाह को 1236 ई0 में सुल्तान घोषित कर दिया। परन्तु फ़िरोजशाह अत्यंत विलासी था। उसकी माँ शाहतुर्कान निर्दयी और कठोर स्वभाव की महिला थी। फ़िरोजशाह की विलासिता और शाहतुर्कान के अत्याचारों से शीघ्र ही अमीर और जनता ऊब गई। अतः उन्होंने फ़िरोजशाह और शाहतुर्कान को कैद में डाल दिया, वही उसकी मृत्यु हो गई और जनता का समर्थन प्राप्त कर रजिया 1236 ई0 में सुल्तान के पद पर आसीन हुई। रजिया को सुल्तान बनाते समय जनता ने धर्माधिकारियो और प्रभवशाली तुर्क अधिकारियों के वर्ग की उपेक्षा की थी, अतः आरम्भ से ही रजिया अनेक समस्याओं से घिरी रही।
*रजिया सुल्तान की उपलब्धियाँ*
यधपि जन समर्थन और कुछ अमीरों के सहयोग से रजिया ने राजगद्दी प्राप्त कर ली थी, तथापि उसकी स्थिति सुदृढ़ नही थी, उसके समक्ष अनेक कठिनाइयाँ थी। सबसे बड़ी समस्या वैध उत्तराधिकार की थी। इल्तुतमिश के बचे हुए पुत्र स्वयं ही गद्दी हड़पना चाहते थे। इनमे सबसे अधिक महत्वाकांक्षी बहरामशाह था, जिसे अनेक अमीर समर्थन दे रहे थे। मुल्तान, बदायूँ, झांसी और लाहौर के सूबेदारों ने उसके विरुद्ध विद्रोह कर दिया। इतना ही नही कई राजपूत राज्यो ने भी विद्रोह का झण्डा खड़ा कर दिया था। राज्य में चारो ओर अराजकता एवं अव्यवस्था व्याप्त थी। अतः रजिया के लिए आवश्यक हो गया कि वह साहस से कम करके परिस्थितियों पर नियंत्रण स्थापित करे।
1* विद्रोहियों के दमन----- रजिया ने सर्वप्रथम विद्रोही सरदकरो को नियंत्रित करने का प्रयास किया। इन विद्रोही सरदारों का दमन करने के लिए उसने कूटनीति की शरण ली, क्योंकि वह समझती थी कि सैनिक शक्ति द्वारा इनका अन्त किया जाना संभव नही है। उसने उनमे फूट डाली जिसके परिणामस्वरूप उनका आपस मे संघर्ष होना प्रारम्भ हो गया और उनकी शक्ति को बड़ा आघात पहुँचा, तथा विद्रोही संघ का अन्त हो गया। इसके उपरांत रजिया ने सैनिक शक्ति के द्वारा एक-एक कर उनका दमन कर डाला। इस प्रकार रजिया ने कूटनीति से काम लेकर अपने विरोधियों का दमन किया।
2 निरंकुश शासिका के रूप में /सुल्तान की प्रतिष्ठा में वृद्धि------ इन प्रारंभिक विजय के बाद रजिया ने अपनी स्थिति सुदृढ करने के लिए सुल्तान के पद एवं प्रतिष्ठा में वृद्धि का भी प्रयास किया। उसने पर्दा छोड़कर पुरुष का वेष(भेष) धारण किया। कुबा(कोट) और कुलाह(टोपी) पहनकर वह दरबार लगाने लगी। उसने पुरुषों की तरह शिकार खेलना और घुड़सवारी करना भी आरम्भ कर दिया। उसके इन कार्यो से जनता प्रभवित हुईं और उसे अपना सच्चा सुल्तान समझनी लगी।
3* प्रशासनिक संगठन---- रजिया ने प्रशासन पर भी अपनी पकड़ मजबूत कर ली। महत्वाकांक्षी तुर्क सरदारों पर नियंत्रण रखने के लिए तथा उनकी शक्ति को कम करने के लिए यह आवश्यक था। अतः उसने गैर वफादार गैर तुर्को को भी राज्य के महत्वपूर्ण पदों पर बहाल किया। नायब वजीर मुहजबुद्दीन को बनाया गया तथा जमालुद्दीन याकूब अमिर -ए-आखूर(अश्वशाला का प्रधान), मलिक हसन गोरी सेनापति बना। कबीर खां अयाज को लाहौर का अक्तदार नियुक्त किया गया परन्तु उसके विद्रोह करने के कारण उसे हटा दिया गया।
4* रजिया के विरुद्ध प्रतिक्रिया एवं विद्रोह---- अपने कार्यो द्वारा रजिया ने राज्य में व्यवस्था स्थापित की तथा अपनी शक्ति सुदृढ़ की, परन्तु इसके साथ ही रजिया के विरुद्ध प्रतिक्रिया और असंतोष भी आरम्भ हुआ। रजिया की बढ़ती शक्ति से तुर्क अमीर भी आशंकित हो उठे और रजिया पर यह आरोप लगाया कि उसका याकूब से अनैतिक संबंध था। अब तुर्क सरदारों ने विद्रोह की ठान ली। सबसे पहले लाहौर के सूबेदार कबीर खां अयाज ने विद्रोह किया, परन्तु यह विद्रोह दबा दिया गया। अब तुर्क सरदारो ने संगठित रूप से विद्रोह की योजना बनाई। बदायूँ और भटिण्डा के अक्तदारो, एतगीन और अल्तुनिया ने 1240 ई0 में विद्रोह कर दिया। विद्रोह का दमन करने के लिए रजिया भटिण्डा की तरफ बढ़ी। इसी बीच एतगीन ने रजिया के प्रेमी याकूब की हत्या कर दी तथा अल्तुनिया के सहयोग से रजिया को बन्दी बना लिया, और तुर्क अमीरों ने बहरामशाह को बादशाह घोषित कर गद्दी पर बैठा दिया। अल्तुनिया की सहायता से रजिया ने अपने को मुक्त करा कर दिल्ली की ओर प्रस्थान किया। 1240 ई0 में में बहरामशाह से पराजित होकर भटिण्डा लौट रही थी, रास्ते मे कैथल नामक स्थान पर उसकी हत्या कर दी गई।
1* विद्रोहियों के दमन----- रजिया ने सर्वप्रथम विद्रोही सरदकरो को नियंत्रित करने का प्रयास किया। इन विद्रोही सरदारों का दमन करने के लिए उसने कूटनीति की शरण ली, क्योंकि वह समझती थी कि सैनिक शक्ति द्वारा इनका अन्त किया जाना संभव नही है। उसने उनमे फूट डाली जिसके परिणामस्वरूप उनका आपस मे संघर्ष होना प्रारम्भ हो गया और उनकी शक्ति को बड़ा आघात पहुँचा, तथा विद्रोही संघ का अन्त हो गया। इसके उपरांत रजिया ने सैनिक शक्ति के द्वारा एक-एक कर उनका दमन कर डाला। इस प्रकार रजिया ने कूटनीति से काम लेकर अपने विरोधियों का दमन किया।
2 निरंकुश शासिका के रूप में /सुल्तान की प्रतिष्ठा में वृद्धि------ इन प्रारंभिक विजय के बाद रजिया ने अपनी स्थिति सुदृढ करने के लिए सुल्तान के पद एवं प्रतिष्ठा में वृद्धि का भी प्रयास किया। उसने पर्दा छोड़कर पुरुष का वेष(भेष) धारण किया। कुबा(कोट) और कुलाह(टोपी) पहनकर वह दरबार लगाने लगी। उसने पुरुषों की तरह शिकार खेलना और घुड़सवारी करना भी आरम्भ कर दिया। उसके इन कार्यो से जनता प्रभवित हुईं और उसे अपना सच्चा सुल्तान समझनी लगी।
3* प्रशासनिक संगठन---- रजिया ने प्रशासन पर भी अपनी पकड़ मजबूत कर ली। महत्वाकांक्षी तुर्क सरदारों पर नियंत्रण रखने के लिए तथा उनकी शक्ति को कम करने के लिए यह आवश्यक था। अतः उसने गैर वफादार गैर तुर्को को भी राज्य के महत्वपूर्ण पदों पर बहाल किया। नायब वजीर मुहजबुद्दीन को बनाया गया तथा जमालुद्दीन याकूब अमिर -ए-आखूर(अश्वशाला का प्रधान), मलिक हसन गोरी सेनापति बना। कबीर खां अयाज को लाहौर का अक्तदार नियुक्त किया गया परन्तु उसके विद्रोह करने के कारण उसे हटा दिया गया।
4* रजिया के विरुद्ध प्रतिक्रिया एवं विद्रोह---- अपने कार्यो द्वारा रजिया ने राज्य में व्यवस्था स्थापित की तथा अपनी शक्ति सुदृढ़ की, परन्तु इसके साथ ही रजिया के विरुद्ध प्रतिक्रिया और असंतोष भी आरम्भ हुआ। रजिया की बढ़ती शक्ति से तुर्क अमीर भी आशंकित हो उठे और रजिया पर यह आरोप लगाया कि उसका याकूब से अनैतिक संबंध था। अब तुर्क सरदारों ने विद्रोह की ठान ली। सबसे पहले लाहौर के सूबेदार कबीर खां अयाज ने विद्रोह किया, परन्तु यह विद्रोह दबा दिया गया। अब तुर्क सरदारो ने संगठित रूप से विद्रोह की योजना बनाई। बदायूँ और भटिण्डा के अक्तदारो, एतगीन और अल्तुनिया ने 1240 ई0 में विद्रोह कर दिया। विद्रोह का दमन करने के लिए रजिया भटिण्डा की तरफ बढ़ी। इसी बीच एतगीन ने रजिया के प्रेमी याकूब की हत्या कर दी तथा अल्तुनिया के सहयोग से रजिया को बन्दी बना लिया, और तुर्क अमीरों ने बहरामशाह को बादशाह घोषित कर गद्दी पर बैठा दिया। अल्तुनिया की सहायता से रजिया ने अपने को मुक्त करा कर दिल्ली की ओर प्रस्थान किया। 1240 ई0 में में बहरामशाह से पराजित होकर भटिण्डा लौट रही थी, रास्ते मे कैथल नामक स्थान पर उसकी हत्या कर दी गई।
*रजिया जे पतन के कारण*
MUST READ:- Achievements of Iltutmish.
अनेक गुणो और व्यक्तिगत योग्यताओं के बावजूद रजिया एक सुल्तान के रूप में असफल रही। उसे प्रारम्भ से ही प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। जिसने अंततः उसे अपना राज्य और जीवन दोनो खोने पर वाध्य कर दिया। रजिया के इतिहास का ठीक प्रकार से अवलोकन करने के पश्चात उसके पतन के कारणों को निम्नलिखित सन्दर्भो के अंतर्गत समझा जा सकता है---
1* रजिया सुल्तान का स्त्री होना---- रजिया के पतन के अनेक कारण उत्तरदायी थे। अनेक इतिहासकारो की मान्यता है कि रजिया की असफलता का मुख्य कारण उसका स्त्री होना था। मुसलमान सरदार एक स्त्री द्वारा अपने को शासित होना अपना अपमान समझते थे। इस्लाम के अनुसार भी एक स्त्री का शासक होना अनुचित था।
2* शासक वर्ग एवं उलेमा वर्ग का असंतोष---- रजिया की असफलता का अन्य मुख्य कारण शासक वर्ग और उलेमा वर्ग का सतत विरोध था। क्योंकि तुर्क अमीर रजिया को अपने हाथों की कठपुतली बनाये रखना चाहते थे, लेकिन जब उनका यह प्रयास विफल हो गया तो उन लोगो ने आपसी कटुता भूलकर संगठित रूप से रजिया का विरोध किया और इसमें वे सफल भी हुए। उलेमा वर्ग भी एक स्त्री को शासक के रूप में स्वीकार करने को तैयार नही था और उसके विरुद्ध अनेक मनगढ़त आरोप लगाए गए। इस प्रकार कहा जा सकता हैं कि उसकी असफलता का मुख्य कारण सामंत एवं उलेमा वर्ग का विरोध था।
3* पारिवारिक असन्तोष----- इल्तुतमिश ने अपने पुत्रों की अयोग्यता को देखकर अपनी बेटी रजिया को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। परन्तु उसके भाई उसे अपना विरोधी मानते थे तथा हमेशा उसके विरुद्ध षडयंत्र रचते रहते थे। विरोधी सरदार भी भइयो का साथ देते थे। अतः पारिवारिक असन्तोष होने के कारण रजिया की शक्ति को बहुत गहरा आघात पहुंचा।
4* याकूब से सम्बंध---- जलालुद्दीन याकूब एक अबीसीनियाई गुलाम था। याकूब ने रजिया को प्रारंभिक संकटो में अत्यंत सहयोग दिया था,अतः वह उसका विशेष कृपापात्र हो गया। रणथम्भौर की विजय के बाद रजिया ने उसे अमीर-उल-उमरा के पद पर पदोन्नत कर दिया था। इस पदोन्नति ने अमीरों को नाराज कर दिया और वे समझने लगे कि रजिया याकूब से प्रेम करती है। मध्यकालीन किसी भी इतिहासकार ने यह नही लिखा कि उसका याकूब से सम्बंध दोषपूर्ण था। इब्नबतूता ने रजिया के प्रेम को दोष-युक्त कहा है किन्तु उसकी बात उन विषयों पर अधिक महत्वपूर्ण नही मानी जानी चाहिए जिसके वह प्रत्यक्ष रूप से सम्पर्क में नही आया।
1* रजिया सुल्तान का स्त्री होना---- रजिया के पतन के अनेक कारण उत्तरदायी थे। अनेक इतिहासकारो की मान्यता है कि रजिया की असफलता का मुख्य कारण उसका स्त्री होना था। मुसलमान सरदार एक स्त्री द्वारा अपने को शासित होना अपना अपमान समझते थे। इस्लाम के अनुसार भी एक स्त्री का शासक होना अनुचित था।
2* शासक वर्ग एवं उलेमा वर्ग का असंतोष---- रजिया की असफलता का अन्य मुख्य कारण शासक वर्ग और उलेमा वर्ग का सतत विरोध था। क्योंकि तुर्क अमीर रजिया को अपने हाथों की कठपुतली बनाये रखना चाहते थे, लेकिन जब उनका यह प्रयास विफल हो गया तो उन लोगो ने आपसी कटुता भूलकर संगठित रूप से रजिया का विरोध किया और इसमें वे सफल भी हुए। उलेमा वर्ग भी एक स्त्री को शासक के रूप में स्वीकार करने को तैयार नही था और उसके विरुद्ध अनेक मनगढ़त आरोप लगाए गए। इस प्रकार कहा जा सकता हैं कि उसकी असफलता का मुख्य कारण सामंत एवं उलेमा वर्ग का विरोध था।
3* पारिवारिक असन्तोष----- इल्तुतमिश ने अपने पुत्रों की अयोग्यता को देखकर अपनी बेटी रजिया को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। परन्तु उसके भाई उसे अपना विरोधी मानते थे तथा हमेशा उसके विरुद्ध षडयंत्र रचते रहते थे। विरोधी सरदार भी भइयो का साथ देते थे। अतः पारिवारिक असन्तोष होने के कारण रजिया की शक्ति को बहुत गहरा आघात पहुंचा।
4* याकूब से सम्बंध---- जलालुद्दीन याकूब एक अबीसीनियाई गुलाम था। याकूब ने रजिया को प्रारंभिक संकटो में अत्यंत सहयोग दिया था,अतः वह उसका विशेष कृपापात्र हो गया। रणथम्भौर की विजय के बाद रजिया ने उसे अमीर-उल-उमरा के पद पर पदोन्नत कर दिया था। इस पदोन्नति ने अमीरों को नाराज कर दिया और वे समझने लगे कि रजिया याकूब से प्रेम करती है। मध्यकालीन किसी भी इतिहासकार ने यह नही लिखा कि उसका याकूब से सम्बंध दोषपूर्ण था। इब्नबतूता ने रजिया के प्रेम को दोष-युक्त कहा है किन्तु उसकी बात उन विषयों पर अधिक महत्वपूर्ण नही मानी जानी चाहिए जिसके वह प्रत्यक्ष रूप से सम्पर्क में नही आया।
*रजिया सुल्तान के चरित्र का मूल्यांकन*
इल्तुतमिश के समस्त वंश में वह सबसे अधिक योग्य तथा प्रभशाली थी। जिसने अपनी योग्यता तथा चरित्र बल के आधार पर दिल्ली सल्तनत की राजनीति को प्रभावित किया। इस बात का ध्यान रखकर ही सुल्तान ने उसको अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया था और इल्तुतमिश ने रजिया के विषय में अमीरों से कहा था "मेरे पुत्र यौवन के भोग-विलास में लिप्त है और उनमे से कोई भी सुल्तान होने के योग्य नही है और मेरी मृत्यु के उपरान्त आप देखेंगे कि राज्य का संचालन करने के लिए मेरी पुत्री से अधिक योग्य कोई व्यक्ति नही है।" इन्ही सब विशेषताओ के आधर पर रजिया सुल्तान के व्यक्तित्व में जो गुण विद्यमान थे उन्ही के आधार पर हम उसके चरित्र का मूल्यांकन निम्नलिखित सन्दर्भो के अंतर्गत कर सकते है----
1* विभिन्न गुणों से युक्त---- तत्कालीन इतिहासकार मिनहाज ने लिखा है "वह महान शासिका, ईमानदार, उदार, शिक्षा की पोषक, न्यायवादी, प्रजापालक तथा युद्ध प्रिय थी। उसमें वे सभी प्रशंसनीय गुण थे, जो एक राजा में होने चाहिए।"
2* वीर, साहसी और कुशल शासिका---- रजिया बड़ी वीर और साहसी थी,वह युद्ध में सक्रिय भाग लेती थी तथा सेना का संचालन स्वयं करती थी तथा बड़ी निडरता के साथ उसने अपने विरोधियों का दमन किया। इसके साथ ही साथ वह कुशल शासिका भी थीं। उसने शासन की सत्ता अपने हाथों में रखी तथा बिना पर्दे के दरबार मे बैठकर सभी शासकीय विभगो का निरीक्षण करती थी और फरियादियों की प्रार्थना सुनकर निष्पक्ष न्याय करती थी।
3* महान कुटनीतिज्ञ----- रजिया वीर, साहसी और कुशल शासिका ही नही थी वरन एक महान कुटनीतिज्ञ तथा चतुर महिला भी थी। उसने अपने विरोधियों में फूट डालकर उनके संघ को बहुत दुर्बल बना दिया। उसने तुर्क अमीरों की शक्ति का दमन किया तथा उनको पूर्णतः अपने अधिकार में करने का प्रयत्न किया। और जब अल्तूनिया ने उसे बन्दी बना लिया, तो उसने बड़ी चतुराई से उसे अपने प्रेम में फँसाकर स्वयं को बंदीगृह से मुक्त कर लिया। वास्तव में उसमे वे समस्त गुण विद्यमान थे जो एक योग्य तथा सफल शासक में होने आवश्यक है।
उपर्युक्त विवरणों के आधार पर इतना तो अवशय स्वीकार करना होगा की वह एक योग्य शासिका थी और उसने सुल्तान के पद की प्रतिष्ठा बनाने की ओर महत्वपूर्ण कार्य किया जो बलबन के शासनकाल में पूर्ण पराकाष्ठा को प्राप्त हुआ।
1* विभिन्न गुणों से युक्त---- तत्कालीन इतिहासकार मिनहाज ने लिखा है "वह महान शासिका, ईमानदार, उदार, शिक्षा की पोषक, न्यायवादी, प्रजापालक तथा युद्ध प्रिय थी। उसमें वे सभी प्रशंसनीय गुण थे, जो एक राजा में होने चाहिए।"
2* वीर, साहसी और कुशल शासिका---- रजिया बड़ी वीर और साहसी थी,वह युद्ध में सक्रिय भाग लेती थी तथा सेना का संचालन स्वयं करती थी तथा बड़ी निडरता के साथ उसने अपने विरोधियों का दमन किया। इसके साथ ही साथ वह कुशल शासिका भी थीं। उसने शासन की सत्ता अपने हाथों में रखी तथा बिना पर्दे के दरबार मे बैठकर सभी शासकीय विभगो का निरीक्षण करती थी और फरियादियों की प्रार्थना सुनकर निष्पक्ष न्याय करती थी।
3* महान कुटनीतिज्ञ----- रजिया वीर, साहसी और कुशल शासिका ही नही थी वरन एक महान कुटनीतिज्ञ तथा चतुर महिला भी थी। उसने अपने विरोधियों में फूट डालकर उनके संघ को बहुत दुर्बल बना दिया। उसने तुर्क अमीरों की शक्ति का दमन किया तथा उनको पूर्णतः अपने अधिकार में करने का प्रयत्न किया। और जब अल्तूनिया ने उसे बन्दी बना लिया, तो उसने बड़ी चतुराई से उसे अपने प्रेम में फँसाकर स्वयं को बंदीगृह से मुक्त कर लिया। वास्तव में उसमे वे समस्त गुण विद्यमान थे जो एक योग्य तथा सफल शासक में होने आवश्यक है।
उपर्युक्त विवरणों के आधार पर इतना तो अवशय स्वीकार करना होगा की वह एक योग्य शासिका थी और उसने सुल्तान के पद की प्रतिष्ठा बनाने की ओर महत्वपूर्ण कार्य किया जो बलबन के शासनकाल में पूर्ण पराकाष्ठा को प्राप्त हुआ।
IN ENGLISH÷
Question-- "Razia had all the qualities of a good ruler, but she failed because her femininity was responsible for this." Explain.
Or
Evaluate the character and achievements of Razia Sultan. Can Razia's being a woman be considered the reason for her downfall?
Or
Describe the circumstances of Razia's ascension and throw light on the causes of his downfall.
Or
Evaluate the character and achievements of Razia Sultan. Can Razia's being a woman be considered the reason for her downfall?
Or
Describe the circumstances of Razia's ascension and throw light on the causes of his downfall.
Ans---- Razia Sultan was the first Muslim woman Sultan of Delhi, who is considered the most worthy of Iltutmish's successors. Diplomatic, political, and administrative capabilities were packed in it. He ruled for only four years (1236--1240 AD), although his accession has special significance in the history of the Sultanate.
Ascension of Razia Sultan-----Iltutmish had expressed his desire to hand over his kingdom to his daughter before his death and nominated Razia as his successor in place of his sons. But the Turk nobles considered it an insult to see a woman ruling. Therefore, many Turk nobles, the mother of Ruknuddin Firoz Shah, Shahturkan and many Iqtadars conspired and declared Ruknuddin Firoz Shah as Sultan in 1236 AD. But Firoz Shah was very luxurious. His mother Shahturkan was a ruthless and harsh woman. The luxuries of Firoz Shah and the atrocities of Shahturqan soon bore the rich and the masses. So he imprisoned Ferozshah and Shahturkan, he died there and after getting the support of the public, Razia ascended to the position of Sultan in 1236 AD. While making Razia Sultan, the people had neglected the religious authorities and the class of influential Turkish officials, so from the beginning Razia was surrounded by many problems.
*Achievements of Razia Sultan*
Although Razia had attained the throne with the support of public support and some nobles, yet her position was not strong, she faced many difficulties. The biggest problem was that of legal succession. The surviving sons of Iltutmish himself wanted to usurp the throne. The most ambitious of these was Bahram Shah, who was supported by many nobles. The subedars of Multan, Badaun, Jhansi and Lahore revolted against him. Not only this, many Rajput states had also raised the flag of rebellion. There was chaos and disorder all around the state. Therefore, it became necessary for Razia to reduce her courage and establish control over the situation.
1* Suppression of Rebels----- Razia first tried to control the rebel Sardkaro. To suppress these rebellious chieftains, she took refuge in diplomacy, because she understood that it was not possible to eliminate them by military power. He divided them, as a result of which they started fighting among themselves and their power suffered a great blow, and the rebel union came to an end. After this Razia suppressed them one by one with the help of military power. In this way Razia oppressed her opponents by acting diplomatically.
2* Increase in the prestige of the Sultan as an autocratic ruler--- After these initial conquests, Razia also tried to increase the position and prestige of the Sultan to strengthen his position. He left the veil and took the disguise of a man. Wearing Kuba (coat) and Kulah (cap), she started courting. Like men, he also started hunting and horse riding. People were impressed by these actions of his and started considering him as their true Sultan.
3* Administrative organization---- Razia strengthened her grip on the administration as well. This was necessary in order to control the ambitious Ottoman chieftains and reduce their power. Therefore, he also reinstated non-loyal non-Turks to important positions in the state. Muhajabuddin was made the Naib Wazir and Jamaluddin Yaqub Amir-e-Akhur (Head of the Horse House), Malik Hasan Ghori became the general. Kabir Khan Ayaz was appointed Aktdar of Lahore but was removed because of his rebellion.
4* Reaction and rebellion against Razia--- Razia established order in the state and strengthened her power through her works, but along with it, reaction and discontent against Razia also started. The Turkish nobles were also apprehensive of Razia's growing power and accused Razia of having an immoral relationship with Yakub. Now the Ottoman chieftains decided to revolt. First, the Subedar Kabir Khan Ayaz of Lahore revolted, but this rebellion was suppressed. Now the Ottoman chieftains organized a plan of rebellion. The Akhdars of Badaun and Bhatinda, Aitgin and Altunia revolted in 1240 AD. To suppress the rebellion, Razia moved towards Bathinda. Meanwhile, Aitgin killed Razia's lover Yakub and took Razia prisoner with the help of Altunia, and the Ottoman nobles declared Bahramshah as emperor and placed him on the throne. With the help of Altunia, Razia freed herself and left for Delhi. In 1240 AD, I was returning to Bhatinda after being defeated by Bahram Shah, she was killed on the way at a place called Kaithal.
*Reason of Razia's downfall*
Despite many qualities and personal qualifications, Razia failed as a sultan. He had to face adversity from the very beginning. Which eventually forced him to lose both his kingdom and life. After observing the history of Razia properly, the reasons for its decline can be understood under the following contexts--
1 * Razia Sultan being a woman ---- Many reasons were responsible for the downfall of Razia. Many historians believe that the main reason for Razia's failure was her being a woman. The Muslim chiefs considered it an insult to be ruled by a woman. According to Islam, it was inappropriate for a woman to be the ruler.
2* Discontent of the ruling class and the Ulema class ---- The other main reason for the failure of Razia was the constant opposition of the ruling class and the Ulema class. Because the Turks wanted to keep Amir Razia as a puppet in their hands, but when their attempt failed, they organized a protest against Razia, forgetting their mutual bitterness and they succeeded in this. The Ulema class was also not ready to accept a woman as the ruler and many fabricated allegations were leveled against her. Thus it can be said that the main reason for its failure was the opposition of the feudal and ulema classes.
3* Family dissatisfaction----- Seeing the disqualification of his sons, Iltutmish had declared his daughter Razia as his successor. But his brothers considered him as their opponent and always kept conspiring against him. Opponent chieftains also supported the brothers. Therefore, Razia's power was deeply hurt due to family dissatisfaction.
4 * Relationship with Yakub ---- Jalaluddin Yakub was an Abyssinian slave. Yakub had given great support to Razia in the initial troubles, so he became her special favor. After the conquest of Ranthambore, Razia promoted him to the rank of Amir-ul-Umra. This promotion angered the Amirs and they began to understand that Razia was in love with Yakub. No medieval historian has written that his relationship with Jacob was faulty. Ibn Battuta has called Razia's love to be faulty, but his words should not be considered as more important on subjects with which he did not come directly into contact.
*Evaluation of the character of Razia Sultan*
She was the most capable and influential of all the dynasty of Iltutmish. Who influenced the politics of Delhi Sultanate on the basis of his ability and strength of character. Keeping this in mind, the Sultan appointed him as his successor and Iltutmish had told the nobles about Razia, "My son is indulging in the pleasures of youth and none of them is worthy of being a Sultan and I will die." After that you will see that there is no person more qualified than my daughter to run the state." On the basis of all these characteristics, the qualities which were present in the personality of Razia Sultan, on the basis of those, we can evaluate her character under the following contexts.
1 * Possessed of various qualities--- The then historian Minhaj has written "She was a great ruler, honest, generous, nurturer of education, jurist, public and war-loving. She had all those admirable qualities, which should be in a king." "
2 * Brave, courageous and skilled ruler ---- Razia was very brave and courageous, she used to take an active part in the war and operated the army herself and with great fear she suppressed her opponents. Along with this, she was also a skilled ruler. He kept the power of governance in his hands and used to inspect all the government departments sitting in the court without veils and listened to the prayers of the complainants and did fair justice.
3* Great diplomat----- Razia was not only a brave, courageous and efficient ruler, but also a great diplomat and a clever woman. He divided his opponents and made their union very weak. He suppressed the power of the Turkic nobles and tried to take them completely under his control. And when Altunia took him prisoner, he freed himself from prison by cleverly trapping him in his love. In fact, he had all those qualities which are necessary in a capable and successful ruler.
On the basis of the above details, it must be accepted that she was an able ruler and she did important work towards making the prestige of the post of Sultan which attained its culmination during the reign of Balban.
TAGS÷रजिया सुल्तान की उपलब्धियाँ, रजिया के पतन के कारण, Medievalhistory.

